क्रिया (Kriya) की परिभाषा, भेद, प्रकार और उदहारण

क्रिया की परिभाषा (Kriya Ki Paribhasha)

जिस शब्द अथवा शब्द-समूह से किसी कार्य के करने या किये जाने का बोध होता है, उसे क्रिया कहते है।

क्रिया हिंदी में (Kriya in Hindi)

  • हम राहुल को दान करना चाहते है
  • आज लक्ष्मी ने दूध नहीं दिया है
  • मैं सूरज की ओर देख रहा था
  • गोवा की होटल बड़ी अच्छी होती है

ऊपर दिए गए वाक्यों में करना चाहते है, दिया (देना) है, देख (देखना) रहा था और होती (होना) है, यह किसी क्रिया का ज्ञान कराते हैं।

क्रिया (Kriya)

क्रिया को मूल रूप को धातु कहाँ जाता हैं। यह धातु रूप लिंग, वचन और काल के अनुसार बदलता रहता है। जैसे

लिंग (Ling)

  • राहुल पढ़ता है। (पुल्लिंग)
  • नेहा पढ़ती है। (स्त्रीलिंग)

वचन (Vachan)

  • रोहित पढ़ता है। (एकवचन)
  • नेहा, सोनू, समीर और गणपत पढ़ते हैं। (बहुवचन)

काल (Kal)

  • राहुल पढ़ता है। (वर्तमानकाल)
  • राहुल पढ़ता था। (भूतकाल)
  • राहुल पढ़ेगा। (भविष्यकाल)

क्रिया के कितने भेद होते है (Kriya Ke Kitne Bhed Hote Hain)

क्रिया के दो भेद होते है, निचे देख सकते है।

  1. अकर्मक क्रिया।
  2. सकर्मक क्रिया।

अकर्मक क्रिया (Akamark Kriya)

जिस क्रियाओं का प्रभाव उसके कर्ता पर ही सीमित रहता है, उसे अकर्मक क्रिया कहते है।

अकर्मक क्रिया के उदाहरण (Akamark Kriya Ke Udaharan)

  • राहुल मधुर स्वर में बोला
  • रोहित का शरीर लाल हो गया
  • मैंने गणपत को उसके बिस्तर पर पाया

कुछ अकर्मक कियाएँ (Kuch Akamark Kriyan)

जैसे उठना, बैठना, सोना, रोना, हँसना, जीना, मरना, कूदना, चढ़ना, डरना, जागना, काटना, करना, धोना, बोलना आदि।

उदाहरण (Udaharan)
  • राहुल सो कर उठ गया।
  • इसे ठीक से बैठना नही आता।
  • यह बात सुनकर मुझे रोना आ रहा है।
  • मुझे यह कार्टून देख कर हँसना आता है।
  • मैं इस पेड़ से कूदना चाहता हूं।
  • मैं इस पेड़ पर चढ़ना चाहता हूं।
  • आज मुझे पढ़ाई करना है।
  • गणपत यशवी से बोलना चाहता है।
  • आज मुझे रात भर जागना होगा।
  • मैं मैदान में खेलना चाहता हूं।

सकर्मक क्रिया (Sakmark Kiya)

जिस क्रियाओं का प्रभाव उसके कर्म पर पड़ता है, वह सकर्मक क्रिया कहलाता हैं।

सकर्मक क्रिया की उदाहरण (Sakmark Kriya Ki Udaharan)

  • कल मैंने एक मोबाइल खरीदा
  • राहुल उठों मैन तुम्हारे लिए चॉकलेट लाया है
  • गोवा में हमें एक मजेदार दृश्य देखने को मिला
  • राहुल ने नई गाड़ी खरीदी है।
  • आज मुझे दस रुपये मिला
  • माँ ने मेरे लिए खिलौने लाई है

क्रिया के अन्य भेद (Kriya Ke Anya Bhed)

क्रिया के अन्य पांच भेद है, नीचे देख सकते है।

सामान्य क्रिया (Samanya Kriya)

जहां केवल एक क्रिया का प्रयोग किया जाता है, उसे सामान्य क्रिया कहते है। जैसे –

  • गौरव हमारे घर आया
  • मैने पढ़ा
  • राहुल ने आम खाया

संयुक्त क्रिया (Sanyuk Kriya)

वाक्य में एक से अधिक क्रियाओं का प्रयोग होता है, वह संयुक्त क्रिया कहलाता है। जैसे –

  • राहुल बालकनी में पड़ा सो रहा था
  • पिताजी ने खाना बांट दिया
  • बापूजी घर आ गए

इन वाक्यों में सो रहा था, बांट दिया, आ गए क्रिया शब्द हैं, परंतु सभी क्रियाएँ एक से अधिक हैं। ये संयुक्त क्रिया हैं।

नामधातु क्रिया (Naamdhatu Kriya)

संज्ञा, सर्वनाम तथा विशेषण शब्दों से बने क्रिया पदों को नामधातु क्रिया कहते है। जैसे – हथियाना, बतियाना, लतियाना, गठियाना आदि।

प्रेरणार्थक क्रिया (Prernarthak Kriya)

जब कर्ता स्वयं कार्य न करके, किसी दूसरे को कार्य करने के लिए कहता है, उसे प्रेरणार्थक क्रिया कहते है। जैसे –

  • वह नेहा से पत्र पढ़वाता है।
  • वह उत्कर्ष से खाना बनवाती है।
  • रोहित नेहा से घर का पाठ करवाता है।
  • नेहा राहुल को नींद से उठवाना चाहती है।
  • मैं अपनी बच्ची को खिलौने दिलवाना चाहती हूं।

प्रेरणार्थक क्रिया के अन्य रूप (Prernarthak Kriya Ke Anya Rup)

प्रेरणार्थक क्रिया के दो अन्य रूप है, नीचे देख सकते है।

  • प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया
  • द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया

पूर्वकालिक क्रिया (Purvkalik Kriya)

जब कोई क्रिया मुख्य क्रिया से पहले ही समाप्त हो जाए, उसे पूर्वकालिक क्रिया कहते है। जैसे –

  • नेहा खाना खाकर स्कूल जाएगी।
  • राहुल पढ़कर इंजीनियर बना चाहता है।

हिंदी व्याकरण (Hindi Grammar)

  1. संज्ञा
  2. सर्वनाम
  3. विशेषण
  4. क्रिया
  5. कारक
  6. विराम चिन्ह
  7. लिंग
  8. वचन
  9. पर्यायवाची (समानार्थी) शब्द
  10. विलोम (विरुधार्थी) शब्द
  11. अनेकार्थी शब्द

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